एक बेबस माँ ने अपने भूखे बच्चे के लिए खाना मागा तो उसका उड़ा मजाक स्वर्णिम भारत मंच की मदद
उज्जैन - कोई बेबस है तो कोई बे सहारा कोई गरीब है तो कोई सिर्फ कागज में गरीबी दिखा कर मजे उड़ा रहा है तो कंही कंही असली हकदार के पास दिखाने को कागज तक नही है
मन को झकझोर करने वाली घटना एकाएक सामने आई एक माँ ने अपने दो दिन से भूखे 5 साल के बच्चे के लिए खाने की मदद माँगी और सूखे राशन की सूची सेंड कर दी जिसके बदले उसका बगैर जांच पड़ताल के मजाक बना दिया
जैसे ही स्वर्णिम भारत मंच को जानकारी लगी तो स्वर्णिम भारत मंच ने उक्त महिला से संपर्क करके वस्तुस्थिति जानी (महिला ने बताया कि मैं किराए के मकान में रहती हूँ मेरे पति रोजगार के चलते बाहर है लॉक डॉउन में आ भी नही पा रहे पैसे भी नही है एक महीने से जैसे तैसे घर का सामान जुटाया पर अब कुछ नही है मेरा 5 साल का बेटा है जिसे दो दिन से कुछ नही खिला पायी हूँ कंही से पता चला कि सरकार मदद कर कर रही है तो मैने वाट्सअप पर सूखे सामान की लिस्ट दी थी पर उन्होंने ना सामान भेजा न खाने के पैकेट ) स्वर्णिम भारत मंच शीघ्र उक्त महिला को भोजन के पैकेट देना शुरू कर दिए व बहुत जरूरी सामान भी उपलब्ध करा दिया गया है
स्वर्णिम भारत मंच किसी एक पक्ष की बात नही करता है कई बार मदद मांगने के नाम पर धांधली होती है जिसके कारण सेवा देने वाली संस्था के कार्यकर्ता समझ नही पाते है कि असली जरूरतमंद कौन है पर भावुक क्षण तब उत्त्पन्न हो जाते जब कोई सही व्यक्ति की आवाज मजाक बन जाती है खेर स्वर्णिम भारत मंच व सभी जिला प्रशासन के साथ काम कर रही संस्थाओं को साधुवाद
स्वर्णिम भारत मंच धन्यवाद भी देता है जिला प्रशासन व जागरूक नागरिकोको